Friday, 8 January 2010

प्यार और बंधन

प्यार जैसी निर्मम वस्तू
क्या भय से
बांधकर रखी जा सकती है ...?
नहीं....!!

वह तो चाहता है..
पूरा विश्वास..
पूरी स्वाधीनता ..
और साथ में पूरी जिम्मेदारी..!

इसमें फैलने की असीमता है..
जिस पर
बंधन रूपी ईटो की दिवार
नहीं बन सकती..!!

6 comments:

  1. सच कहा ........ प्यार को बाँध कर नही रखा जा सकता ........ वो तो धारा है जो चलती रहती है ...........

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  2. सच कहा.....प्यार वही है जैसा आपने बताया। अच्छी रचना।

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  3. Jise bandha ja ske vo pyar hi kaha..
    anamika ji..ek aur siksar....
    badhiya likha ha..

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  4. इसमें फैलने की असीमता है..
    जिस पर
    बंधन रूपी ईटो की दीवार
    नहीं बन सकती..!!

    बिलकुल सही कहा .....इसे नि:सीम ही फ़ैलाने देना चाहिए .

    सुन्दर रचना...

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  5. काबिलेतारीफ बेहतरीन

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