Tuesday, 4 May 2010

दुखांत ये नहीं होता .....

दुखांत यह नहीं होता कि रात की कटोरी को कोई जिन्दगी के शहद से भर न सके, और वास्तविकता के होंठ कभी उस शहद को चख ना सकें ....दुखांत यह होता है कि जब रात की कटोरी पर से चंद्रमाँ की कलई उतर जाये और उस कटोरी में पड़ी कल्पनाये कसैली हो जाये.

दुखांत ये नहीं होता की आपकी किस्मत से आपके साजन का नाम-पता ना पढ़ा जाये और आपकी उम्र की चिट्ठी सदा रुलती रहे. दुखांत यह होता है कि आप अपने प्रिये को अपनी उम्र कि सारी चिट्ठी लिख लें और आपके पास से आपके प्रिये का नाम पता खो जाये.

दुखांत यह नहीं होता कि जिन्दगी की लम्बी डगर पर समाज के बंधन अपने कांटे बिखेरते रहे..और आपके पैरो में से सारी उम्र लहू बहता रहे. दुखांत यह होता है कि आप लहू लुहान पैरो से एक ऐसी जगह पर खड़े हो जाये जिसके आगे कोई रास्ता आपको बुलावा न दे.

दुखांत यह नहीं होता कि आप अपने इश्क के ठिठुरते शरीर के लिए सारी उम्र गीतों के पैरहन सीते रहें. दुखांत यह होता है कि इन पैरहनो को सीने के लिए आपके विचारो का धागा चूक जाये और आपकी सुई (कलम) का छेद टूट जाये.

....अम्रिता प्रीतम

18 comments:

  1. Amrita pritam ke likhe ye ansh lekar aati hain...aur purana padha sab taaja ho jata hai...A big Thankuu

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  2. अमृता प्रीतम के लिखे ये अंश लेकर आती हैं ...और पुराना पढ़ा सब ताजा हो जाता है ...अ बिग थैंक यू.

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  3. बढ़िया विचार के साथ एक बढ़िया प्रस्तुति..धन्यवाद अनामिका जी

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  4. अमृता प्रीतम जी के सुन्दर विचारों को प्रस्तुत करने के लिये आभार

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  5. अच्छा लगा पढ़ना ...

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  6. bahut khoob anamika ji dukhant ki kya paribhasha di hai...

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  7. अमृता जी के विचार यहाँ पढने को मिले...अहोभाग्य ...आभार

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  8. अमृता प्रीतम अहसासों का प्रियतम और अमर नाम है ..कोई ले दे तो जैसे अमृता जी की सतरें साथ चलने लगती है।
    इन उद्धरणों के लिए बधाई

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  9. बहुत बढिया प्रस्तुती धन्यवाद

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  10. अमृता जी के साथ दुखान्त उनका सुखान्त ही रहा ।
    रचना सँयोजन के लिए साधुवाद ।

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  11. दुखांत यह नहीं होता कि आप अपने इश्क के ठिठुरते शरीर के लिए सारी उम्र गीतों के पैरहन सीते रहें. दुखांत यह होता है कि इन पैरहनो को सीने के लिए आपके विचारो का धागा चूक जाये और आपकी सुई (कलम) का छेद टूट जाये.

    सहेजने योग्य शब्द .....!!

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  12. आपके पैरो में से सारी उम्र लहू बहता रहे. दुखांत यह होता है कि आप लहू लुहान पैरो से एक ऐसी जगह पर खड़े हो जाये जिसके आगे कोई रास्ता आपको बुलावा न दे.
    दुखांत यह नहीं होता कि आप अपने इश्क के ठिठुरते शरीर के लिए सारी उम्र गीतों के पैरहन सीते रहें. दुखांत यह होता है कि इन पैरहनो को सीने के लिए आपके विचारो का धागा चूक जाये और आपकी सुई (कलम) का छेद टूट जाये.
    aah , Amrita Preetam ne maanav man ki samajh ko jaise shabd de diye ...

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  13. ye sb amrita ji ke liye shrdhanjliyan hai .vo jha bhi hongi in pak ehsason ko dil se mhsoos krti hongi .

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