Monday, 19 April 2010
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हमारे जाने - माने मश-हूर लेखको के लेखन से एकत्र की कुछ अभिव्यक्तिया जो मैं यहाँ समय समय पर लिखने की कोशिश कर्रूँगी. प्रार्थना है कि सभी पढने वाले इन्हें पढ़ कर अपनी टिप्पणियों द्वारा अपना योगदान दे अनुग्रहीत करे ...
sajha karne ke liye dhanyawad...
ReplyDeletehttp://dilkikalam-dileep.blogspot.com/
अच्छा लगा अमृता जी की यह पंक्तियाँ पढ़कर.
ReplyDeleteमुहब्बत और दर्द का पुराना रिश्ता है.....बहुत अच्छी पंक्तियाँ अमृता जी की
ReplyDeleteसच ही कहा है...वैसे ये छाती फटने वाली बात को महसूस नहीं किया अभी तक....
ReplyDeleteआपका अंदाज़ पसंद आया ...सबसे हठ के..
ReplyDeleteशुभकामनायें !
बहुत अच्छी पंक्तियाँ अमृता जी की
ReplyDeleteआज मैंने पुरुष स्वभाव ,प्रेम ,एक कहानी अमरता की ज़ुबानी ,व्यक्तित्व की पहिचान ,नारी मन ,कविता से क्या मिलता है और प्यार का अंत पढ़ा ।अच्छे साहित्यकार को पढना,फिर उसमे से अच्छे पद,वाक्य ,या कोई सारगर्भित बात नोट कर उसे पोस्ट कर पाठकों को पढवाना,साहित्य के क्षेत्र में एक सराहनीय कार्य है ,वरना ऐसे साहित्यकारों को आजकल पढ़ता कौन है ,जहां तक आज की प्रस्तुति का ताल्लुक है अमृता जी की लेखन शैली ,उनकी थिंकिंग की तो बात ही अलग है ।यही बात आज से कितने सैकड़ा बर्ष पूर्व दूसरे रूप में कही जा चुकी है ""जो मै ऐसा जानती प्रीत करे दुःख होय ,नगर ढिढोरा पीटती प्रीत न करिए कोय "न जाने कितने वर्ष पूर्व एक गाना लिखा जा चुका है ""इसमें खुशियाँ है कम ,बेशुमार है गम ,आंसू हजार ऐसा ही कुछ गाना था ।आपका अध्ययन और चयन तारीफ के काबिल है
ReplyDeleteBrij mohan ji aapne acchhe udahran diye pyar ke vishay par. aapne mere prayaas ko saraaha iske liye me aapki aabhari hu. shukriya aap jaise kadrdan aise blogs padhte aur pasand karte hai aur hausla badhate hai.
ReplyDeleteमाफ़ करें पर प्यार दुःख तभी देता है जब स्वार्थ भाव से किया जाये या फिर स्वार्थी लोगो से.
ReplyDeleteshayad pahli baar aya main aapke blog par, achha laga - bahut achha laga lekin ab kabhi dobaara main yahan nahin aaungaa... kyonki follower ban gaya hoon isliye yahi roz mere paas aayega ...ha ha ha ha
ReplyDelete- albela khatri